जहां कभी आपको बहुत अच्छे सपने दिखते हैं, वहीं कई बार आप डर और घबराहट से उठते हैं.
डरावना सपना देखना कोई बीमारी नहीं है, लेकिन जब यह बार-बार हो, दिनभर काम करने की क्षमता कम करे, दिमाग में उसकी यादें बनी रहें या व्यक्ति सोने से ही डरने लगे, तब इसे नाइटमेयर डिसऑर्डर माना जाता है. ऐसे लोगों में अक्सर थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी, याददाश्त में कमी और बुरे सपनों का लगातार डर देखने को मिलता है. बच्चों में यह समस्या होने पर माता-पिता की नींद भी प्रभावित होती है.
खास बात ये भी है कि बड़े भी इस तरह का सपना देखते हैं.
सपने मूल रूप से ऐसी कहानियां और चित्र होते हैं जो हमारा दिमाग में सोते समय बनते हैं। वे सजीव भी हो सकते हैं और कभी-कभी वे आपको खुश, उदास या डरा हुआ महसूस करा सकते हैं। और हमे यह लगता है की डरावने सपने क्यों आते हैं, जो पूरी तरह से भ्रामक या तर्कसंगत नहीं लगते हैं।
सपने आना बहुत ही आम बात है. जब भी आप सोते हैं, तो आपको किसी न किसी तरह के सपने आते हैं.
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ये सपने तब आते हैं, जब आप या तो कोई भूतिया फिल्म देख लेते हैं.
प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक सिगमंड फ्रायड का सपने क्यों आते हैं इसे लेकर ऐसा मानना था कि सपने हमारे अवचेतन मन की एक खिड़की की तरह होते हैं और ये हमे उस व्यक्ति के बारे में बताते हैं, जैसे:
सपनों को एक्सप्लेन करें: उन अंतर्निहित भावनाओं और स्थितियों को समझने के लिए अपने सपनों का विश्लेषण करें जो उन्हें पैदा कर सकती हैं।
नाइटमेयर आने पर आपको थकान कमजोरी होने जैसे लक्षण दिख सकते हैं.
हेल्दी स्लीप एनवायरनमेंट क्रिएट करें: अपने कमरे में अंधेरा, शांत और ठंडा या गर्म (मौसम के अनुकूल) वतावरण बनाएं, इससे एक बेहतर गुणवत्ता वाली नींद प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
किसी काम या बात को लेकर जरूरत से ज्यादा सोचना और चिंता करने से भी बुरे सपने आते हैं, जिसकी वजह से अक्सर रातों को घबराहट होती है और नींद खुल जाती है.
आज हम आपको आम तौर पर आने वाले बुरे सपनों और उनके मतलब बताएंगे. चलिए जानते हैं.
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